पिचिंग — अपना आइडिया बेचना
प्रिया की तबाही वाली पहली पिच
प्रिया की पहली निवेशक मीटिंग गुड़गाँव के एक ग्लास-वॉल्ड कॉन्फ़्रेंस रूम में थी। निवेशक — एक सीड फ़ंड का साझेदार — सामने बैठा था, लैपटॉप खुला, ब्लैक कॉफ़ी पी रहा था।
प्रिया ने 20 स्लाइड्स बनाई थीं। रात 2 बजे तक जागकर एक और चार्ट, एक और बुलेट पॉइंट ऐड किया था। लैपटॉप खोला, प्रोजेक्टर कनेक्ट किया, और नोट्स से पढ़ना शुरू किया।
स्लाइड 1: कंपनी इंट्रोडक्शन। स्लाइड 2: टीम। स्लाइड 3: मिशन स्टेटमेंट। स्लाइड 4: विज़न स्टेटमेंट। स्लाइड 5: एग्रीकल्चर सेक्टर इन India — 15 मिनट का ओवरव्यू छह सब-चार्ट्स के साथ।
स्लाइड 7 पर निवेशक ने रोका। "उत्पाद असलीी करता क्या है?"
प्रिया लड़खड़ाई। स्लाइड 14 पर कूदी जहाँ ऐप का स्क्रीनशॉट था। लेकिन कोई कॉन्टेक्स्ट नहीं बना था। कोई स्टोरी नहीं। कोई हुक नहीं।
"कितने फ़ार्मर्स इस्तेमाल कर रहे हैं?"
स्लाइड 11 पर वापस गई। फिर स्लाइड 16 पर। नंबर्स बिखरे हुए थे बिना लॉजिक के।
"राजस्व मॉडल क्या है?"
प्रिया एक सेकंड फ़्रीज़ हो गई। जवाब पता था। महीनों सोचा था। लेकिन उस मोमेंट में, उस स्क्रीन पर, उस रूम में, उस प्रेशर में — दिमाग़ ब्लैंक।
मीटिंग 18 मिनट्स में ख़त्म। निवेशक पोलाइट था। बोला "सर्कल बैक" करूँगा। कभी नहीं किया।
वापस हल्द्वानी की बस में — छह घंटे — प्रिया हर मोमेंट रिप्ले करती रही। समस्या बिज़नेस नहीं था। बिज़नेस सॉलिड था। समस्या पिच थी।
हर फ़ाउंडर की पहली पिच ख़राब होती है। अच्छे फ़ाउंडर्स उससे सीखते हैं।
पिच क्या है?
पिच एक स्ट्रक्चर्ड, कम्पेलिंग प्रेज़ेंटेशन है जो आप किसी को देते हो जो पैसे, एडवाइस, या साझेदारी दे सकता है।
सिंपल लगता है। है नहीं। जो चीज़ आपने महीनों-सालों में बनाई — कॉम्प्लेक्स, न्यूआंस्ड, डीपली पर्सनल — उसे 10-15 मिनट्स में कम्प्रेस करना है ताकि एक अजनबी आप पर पैसे लगाए।
अच्छी पिच तीन काम करती है:
- समस्या अर्जेंट और रियल लगे — लिसनर को केयर करना चाहिए
- समाधान ज़ाहिर और ताक़तवर लगे — "हाँ, ये पहले क्यों नहीं है?"
- आप वो पर्सन लगो जो ये कर सकता है — ट्रस्ट, कॉम्पिटेंस, ग्रिट
तीनों हासिल करो तो सेकंड मीटिंग मिलेगी।
पिच डेक: 10-12 स्लाइड्स
स्लाइड 1: टाइटल
कंपनी नेम, एक-लाइन डिस्क्रिप्शन, आपका नाम।
PahadiDirect — पहाड़ी फ़ार्मर्स को सीधे अर्बन बायर्स से जोड़ना।
स्लाइड 2: समस्या
क्या टूटा है? कौन परेशान है? ख़ास और इमोशनल बनाओ।
रानीखेत का फ़ार्मर India के बेहतरीन सेब उगाता है। उसे मिलते हैं ₹40/kg। दिल्ली में आप देते हैं ₹200/kg। बीच के 4 मिडलमैन 80% वैल्यू दर्ज कर लेते हैं।
स्टैटिस्टिक्स नहीं, स्टोरी बताओ। पर्सन का नाम लो। रियल बनाओ।
स्लाइड 3: समाधान
क्या करते हो, कैसे समस्या फ़िक्स करते हो? सिंपल रखो।
PahadiDirect एक मोबाइल ऐप है जिससे फ़ार्मर्स अपना प्रोड्यूस लिस्ट करते हैं और सीधे Delhi, Chandigarh, Dehradun के बायर्स को बेचते हैं। नो मिडलमैन। फ़ार्मर्स को 60-80% ज़्यादा मिलता है। बायर्स को 20% सस्ता और ताज़ा।
स्लाइड 4: हाउ इट वर्क्स
उत्पाद दिखाओ। स्क्रीनशॉट्स, डेमो, सिंपल डायग्राम।
स्लाइड 5: मार्केट साइज़
ऑपर्च्यूनिटी कितनी बड़ी है? TAM-SAM-SOM फ़्रेमवर्क इस्तेमाल करो।
स्लाइड 6: बिज़नेस मॉडल
पैसे कैसे बनते हैं? ख़ास रहो।
हर ट्रांज़ैक्शन पर 12% कमीशन। एवरेज ऑर्डर ₹2,400। राजस्व पर ऑर्डर ₹288।
स्लाइड 7: ट्रैक्शन
अब तक क्या हासिल किया? नंबर्स, चार्ट्स, बढ़त कर्व्स।
340 फ़ार्मर्स, 1,200 बायर्स, ₹12 लाख मंथली GMV, 22% मंथ-ओवर-मंथ बढ़त, 68% बायर रिपीट रेट।
अक्सर सबसे इम्पॉर्टेंट स्लाइड यही होती है। "आइडिया है" और "बिज़नेस है" में यही फ़र्क़ है।
स्लाइड 8: टीम
कौन बना रहा है? क्वालिफ़ाइड क्यों हो?
निवेशक लोगों में निवेश करते हैं।
स्लाइड 9: कॉम्पिटीशन
और कौन कर रहा है? तुम अलग कैसे हो?
"कॉम्पिटीशन नहीं है" मत बोलो। निवेशक नहीं मानते। लैंडस्केप दिखाओ, यूनीक फ़ायदा समझाओ।
स्लाइड 10: गो-टू-मार्केट
ग्राहकों कैसे लाओगे? डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रैटेजी क्या है?
स्लाइड 11: फ़ाइनैंशियल्स
2-3 साल की राजस्व प्रोजेक्शन्स। की असंप्शन्स। लाभप्रदता का पाथ।
स्लाइड 12: दि आस्क
कितना रेज़ कर रहे हो? क्या करोगे? कौन से माइलस्टोन्स हिट करोगे?
पिचेस में स्टोरीटेलिंग
सबसे आम ग़लती: ख़ुद से शुरू करना। "हाय, मैं प्रिया हूँ, B.Tech से..."
किसी को फ़र्क़ नहीं। अभी नहीं। समस्या फ़ील करवाने के बाद केयर करेंगे।
समस्या से शुरू करो। स्टोरी बनाओ।
"रावत जी India के कुछ बेहतरीन सेब उगाते हैं। उनका बाग़ 6,500 फ़ीट पर है कुमाऊँ की पहाड़ियों में। बिल्कुल सही ऑल्टीट्यूड, सॉइल, क्लाइमेट।
पिछली सीज़न में 800 kg प्रीमियम सेब तोड़े। एक मिडलमैन गाँव आया, ₹40/kg बोला, सारा माल ले गया। वो सेब दिल्ली के INA Market में ₹200/kg बिके।
रावत जी ने कमाए ₹32,000। मिडलमेन ने कमाए ₹1,28,000। क्या करके? ट्रांसपोर्ट और रीसेल।
ये 1.2 करोड़ हिल फ़ार्मर्स के साथ होता है India में। हम ये फ़िक्स कर रहे हैं।"
अब निवेशक ध्यान दे रहा है। अब ऐप, टेक्नोलॉजी, टीम की बात करो।
प्रिया की सुधार्ड पिच
पहली डिज़ास्टर मीटिंग के बाद प्रिया ने दो हफ़्ते पिच रीबिल्ड की। तीन फ़ाउंडर्स से राय लिया। पुष्पा दीदी के सामने अभ्यास की (टेक कुछ समझ नहीं आई लेकिन बोलीं, "बेटा, बहुत तेज़ बोल रही हो और डरी हुई लग रही हो — धीरे बोलो")।
नया ओपनिंग:
"रानीखेत का फ़ार्मर India के बेहतरीन सेब उगाता है। उसे मिलते हैं ₹40/kg। आप देते हैं ₹200/kg। हम ये फ़िक्स कर रहे हैं।
PahadiDirect 340 हिल फ़ार्मर्स को सीधे 1,200 अर्बन बायर्स से जोड़ता है। नो मिडलमैन। फ़ार्मर्स 60% ज़्यादा कमाते हैं। बायर्स 20% कम देते हैं। 8 महीने में ₹72 लाख ट्रांज़ैक्शन्स, 22% मंथ-ओवर-मंथ बढ़त।
मैं प्रिया हूँ। ये Bangalore के को-वर्किंग स्पेस से नहीं बनाया — हल्द्वानी से बनाया। यहीं पली-बढ़ी हूँ। इन फ़ार्मर्स को जानती हूँ। और ₹75 लाख चाहिए 3 डिस्ट्रिक्ट्स से पूरे Uttarakhand तक ले जाने के लिए।"
30 सेकंड्स। समस्या, समाधान, ट्रैक्शन, डिफ़रेंशिएशन, आस्क — सब कवर। निवेशक हुक्ड। अब बाक़ी 14 मिनट्स कन्वर्सेशन है, लेक्चर नहीं।
एलिवेटर पिच (30 सेकंड्स)
हर पिच कॉन्फ़्रेंस रूम में नहीं होती। कभी 30 सेकंड्स मिलते हैं — नेटवर्किंग इवेंट में, हॉलवे में।
फ़ॉर्मूला: हम [X] करते हैं [Y] के लिए क्योंकि [Z]। हमने [ट्रैक्शन] हासिल किया है।
प्रिया की: "हम Uttarakhand के हिल फ़ार्मर्स को मोबाइल ऐप से सीधे अर्बन बायर्स से कनेक्ट करते हैं, मिडलमैन हटाते हैं ताकि फ़ार्मर्स ज़्यादा कमाएँ और बायर्स कम दें। 8 महीने में 3 डिस्ट्रिक्ट्स में ₹72 लाख GMV।"
अभ्यास करो जब तक एफ़र्टलेस न हो जाए। चाय ऑर्डर करते हुए बोल सको — इतना नैचुरल।
डेमो डे vs निवेशक मीटिंग
बहुत अलग फ़ॉर्मैट्स हैं। दोनों के लिए सेम तैयारी मत करो।
डेमो डे (3-5 मिनट्स, चरण पर)
- 50-200 लोग ऑडियंस में
- 10-15 स्टार्टअप्स में से एक हो
- बहुत लिमिटेड टाइम — हर सेकंड काउंट्स
- स्टोरी और बड़े नंबर्स पर ध्यान
- गोल: लोग इंटरेस्टेड होकर बाद में तरीक़ा करें
- ऊर्जा और चरण प्रेज़ेंस मायने रखती है
निवेशक मीटिंग (30-60 मिनट्स, वन-ऑन-वन)
- 1-3 लोग रूम में
- कन्वर्सेशन है, प्रदर्शन नहीं
- 10-15 मिनट्स प्रेज़ेंट, 15-30 मिनट्स Q&A
- निवेशक इंटरप्ट करेंगे — अच्छा साइन है (एंगेज्ड हैं)
- मापदंड, मार्केट, स्ट्रैटेजी में डीपर जाओ
- "आई डोंट नो" बोलना ओके है
Q&A सँभालना
Q&A अक्सर प्रेज़ेंटेशन से ज़्यादा मायने रखती है।
"तुम्हीं क्यों — ये हल करने के लिए?" यूनीक इनसाइट, अनुभव, समस्या से कनेक्शन बताओ।
"अगर [बड़ी कंपनी] ये करे?" पैनिक मत करो। जोखिम एक्नॉलेज करो, फ़ायदा बताओ। "Flipkart कर सकता है, लेकिन वो अल्मोड़ा के गाँव में बैठकर फ़ार्मर्स ऑनबोर्ड नहीं करेगा।"
"बर्न रेट क्या है?" ये नंबर एग्ज़ैक्टली पता होना चाहिए। नहीं पता तो मीटिंग ख़त्म।
"अगर ये राउंड नहीं रेज़ हो?" ऑनेस्ट रहो। "4 मंथ्स रनवे है। लागतें कट करेंगे, राजस्व पर ध्यान करेंगे। मरेंगे नहीं, लेकिन बढ़त स्लो होगी।"
"सबसे बड़ा जोखिम?" नेम करो। डॉज मत करो। निवेशक इज़्ज़त करते हैं फ़ाउंडर्स को जो जोखिम्स जानते हैं।
Q&A के तीन नियम:
- जो पूछा गया वो आंसर करो — टॉपिक बदलाव मत करो
- "आई डोंट नो" बोलना ओके है — "लेकिन ऐसे पता करूँगी" ऐड करो
- आंसर्स 60 सेकंड्स से कम रखो
निवेशक असलीी क्या इवैल्यूएट करते हैं
सीक्रेट: निवेशक स्लाइड्स इवैल्यूएट नहीं कर रहे। आपको इवैल्यूएट कर रहे हैं स्लाइड्स के थ्रू।
रियल स्कोरकार्ड:
- टीम (50%) — ये लोग एग्ज़ीक्यूट कर सकते हैं? स्मार्ट, रेज़िलिएंट, ऑनेस्ट हैं?
- मार्केट (30%) — मार्केट इतना बड़ा है वेंचर-स्केल आउटकम सपोर्ट करने को?
- उत्पाद (20%) — उत्पाद काम करता है? लोग चाहते हैं?
उत्पाद सिर्फ़ 20%। सरप्राइज़? लेकिन निवेशक जानते हैं — अच्छी टीम मीडियोकर उत्पाद फ़िक्स कर सकती है। अच्छा उत्पाद बुरी टीम के साथ इस्तेमालुअली नाकाम करता है।
पिच के बाद फ़ॉलो-अप
पिच रूम से बाहर निकलने पर ख़त्म नहीं होती।
- 24 घंटे में थैंक-यू ईमेल। शॉर्ट, पेशेवर, वॉर्म।
- डेक अटैच करो (PDF)।
- Q&A में वादा किया डेटा भेजो।
- नेक्स्ट चरण समराइज़ करो।
- पेस्टर मत करो। 1 हफ़्ते में रिस्पॉन्स नहीं — एक जेंटल फ़ॉलो-अप। दो फ़ॉलो-अप के बाद साइलेंस — मूव ऑन।
सब ट्रैक करो। सिंपल स्प्रेडशीट: निवेशक नेम, फ़ंड, डेट, स्टेटस, फ़ॉलो-अप डेट, नोट्स। फ़ंडरेज़िंग एक पाइपलाइन है, सेल्स जैसे।
अभ्यास, अभ्यास, अभ्यास
अच्छी पिच और ख़राब पिच का फ़र्क़ कॉन्टेंट में ऑलमोस्ट कभी नहीं होता। डिलीवरी में होता है।
कैसे अभ्यास करें:
- मिरर अभ्यास। खड़े होकर ख़ुद को प्रेज़ेंट करो। स्क्रिप्ट से पढ़ रहे हो? रोको।
- दर्ज करो। देखने में दर्द है, लेकिन इनक्रेडिबली उपयोगी। फ़िलर वर्ड्स, रशिंग, मोनोटोन वॉइस — गौर करोगे।
- फ़्रेंड्स के साथ अभ्यास। 2-3 लोग (आइडियली फ़ाउंडर्स), ऑनेस्ट राय लो।
- नॉन-फ़ाउंडर्स के साथ। माँ को समझ आई? पुष्पा दीदी पहले दो मिनट्स पालन कर पाईं? राइट ट्रैक पर हो।
- Q&A अभ्यास। किसी से टफ़ क्वेश्चन्स फ़ायर करवाओ।
- टाइमर के साथ। 10 मिनट्स पिच — एग्ज़ैक्टली 10 मिनट्स अभ्यास करो।
प्रिया ने अगली निवेशक मीटिंग से पहले 23 बार पिच अभ्यास की। पुष्पा दीदी को, पेरेंट्स को (कन्फ़्इस्तेमाल्ड थे लेकिन सपोर्टिव), दो फ़ाउंडर फ़्रेंड्स को वीडियो कॉल पर, और रात 11 बजे बाथरूम मिरर में अपने रिफ़्लेक्शन को।
दूसरी निवेशक मीटिंग 45 मिनट्स चली। निवेशक ने 14 क्वेश्चन्स पूछे। प्रिया ने सब आंसर किए। एंड में बोला, "डेटा रूम भेजो। डीपर देखना चाहता हूँ।"
वो निवेशक उसका लीड एंजेल बना।
की टेकअवेज़
- पहली पिच शायद ख़राब जाएगी। सामान्य है। सीखो और सुधार करो।
- 10-12 स्लाइड्स। समस्या, समाधान, हाउ इट वर्क्स, मार्केट, बिज़नेस मॉडल, ट्रैक्शन, टीम, कॉम्पिटीशन, गो-टू-मार्केट, फ़ाइनैंशियल्स, दि आस्क।
- स्टोरी से शुरू करो, ख़ुद से नहीं। समस्या फ़ील करवाओ पहले।
- एलिवेटर पिच (30 सेकंड्स) सबसे इम्पॉर्टेंट टूल है।
- Q&A प्रेज़ेंटेशन से ज़्यादा मायने रखती है।
- निवेशक बेट करते हैं टीम्स पर, फिर मार्केट्स, फिर उत्पाद।
- 24 घंटे में फ़ॉलो-अप। पेशेवर, वॉर्म, कंसाइज़।
- अभ्यास करो जब तक नैचुरल न लगे। फिर और अभ्यास करो।
प्रिया के पास फ़ंडिंग है। पिच ठीक है। अब अगला चुनौती — ऐप 3 डिस्ट्रिक्ट्स में काम करता है। पूरे Uttarakhand में कैसे ले जाए? फिर Himachal? फिर पूरे India में? यही स्केलिंग है, और यहीं ज़्यादातर स्टार्टअप्स टूटती हैं।